खटुआ हत्याकांड: आखिर कौन अधिकारी था जिसने नहीं दी थी छुट्टी

खटुआ हत्याकांड: आखिर कौन अधिकारी था जिसने नहीं दी थी छुट्टी
एसआईटी की टीम जानकारी कर रही हासिल, अधिकारियों से भी होगी पूछताछ
जबलपुर। धनुष तोप में चाइनीज बैयरिंग घोटाले के संदेही जीसीएफ के डब्ल्यूजीएम एससी खटुआ हत्याकांड में एसआईटी की टीम सिर्फ कर्मचारियों व परिवार वालों से ही पूछताछ कर रही थी लेकिन अब एसआईटी के अधिकारी फैक्ट्री के अधिकारियों से भी पूछताछ करेंगे। टीम को शक है कि इस घटना को अलग ही मोड़ देने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही यह भी जानने का प्रयास किया जा रहा है कि किस अधिकारी के कहने पर एससी खटुआ को छुट्टी नहीं दी गई थी जबकि यह मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है जिसे देखते हुए उस अधिकारी के बारे में भी जानकारी हासिल की जा रही है।
ये हैं पूरा मामला
गौरतलब हो कि गन कैरिज फैक्टरी में जूनियर वक्र्स मैनेजर के पद पर पदस्थ 50 वर्षीय एससी खटुआ की डीकम्पोज लाश 5 फरवरी की शाम सेंट्रल स्कूल नं. 1 पीछे पंप हाउस के पास पत्थरों के बीच एक खोह में मिली थी। जनवरी माह में दिल्ली से फैक्टरी पहुंची टीम ने खटुआ से करीब 1 घंटे पूछताछ करने के बाद
नोटिस देते हुए दिल्ली तलब किया था। वे जाने की तैयारी कर रहे थे लेकिन फैक्ट्री के अधिकारी ने उन्हें छुट्टी देने से इंकार कर दिया। परिजनों का आरोप था कि अधिकारी ने इसे निजी कारण बताते हुए छुट्टी देने से इंकार कर दिया। जबकि इतने बड़े मामले में पूछताछ जरूरी थी। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि श्री खटुआ कुछ ऐसा जानते थे जिससे धनुष तोप बेयरिंग मामले में आरोपी बेनकाब हो सकते थे। लेकिन इससे पहले ही एससी खटुआ की हत्या कर दी गईं। 16 जनवरी को देर शाम खटुआ घर से निकले फिर नहीं लौटे थे।
असली गुनहगार कौन?
बताया जा रहा है कि एससी खटुआ की मेल आईडी से आखिरी बार सीबीआई को मेल किया गया जिसमें फैक्ट्ररी के अंदर होने वाली गड़बडिय़ों का जिक्र किया गया है। मेल में कहा गया है वे तो सिर्फ मोहरा है। असली गुनहगार तो कोई और है। इस मेल के बारे में जब सभी को पता चला तो कुछ फैक्ट्री कर्मचारियों ने इसे सच बताया तो कुछ ने इसे साजिश बताया।
20 अधिकारी शक के दायरे में कर्मचारियों का कहना है कि एससी खटुआ की मेल आईडी हमेशा से ही लॉग इन रहती थी हो सकता है कि किसी और ने सीबीआई को यह मैसेज भेजा हो। इस बात में कितनी सच्चाई है इसका पता तो जांच के बाद ही चलेगा लेकिन इससे बाद
जांच के निशाने पर फैक्ट्ररी के 20 अधिकारी आ गए है जिनमें से आठ तो रिटायर्ड भी हो चुके है।

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