जबलपुर…रेत के अवैध कारोबार को लगे पंख,, आसमान छू रहे दाम,,, प्रशासन एक दम मौन

रेत के अवैध कारोबार को लगे पंख
आसमान छू रहे दाम, प्रशासन एक दम मौन
जबलपुर।
काले सोने के रूप में तब्दील हो चुकी नर्मदा की रेत के अवैध कारोबार को अचानक ही पंख लग गए है। इन दिनों रेत के दाम एक दम से आसमान छू रहे है। जिसके कारण भवन के अलावा अन्य निर्माण कामों क ी लागत में तेजी से इजाफा हो रहा है। वहीं रेत के लगातार बढ़ रहे दामों पर प्रशासन का मौन समझ के परे बना हुआ है। अवैध घाटों से निकल रही रेत के चलते सरकार को राजस्व में भी घाटा उठाना पड़ रहा है।

निर्माण लागत हुई महंगी
काले सोने के रूप में विख्यात हो चुकी नर्मदा की रेत से हर ठेकेदार निर्माण कार्य करना चाहता है,लेकिन अचानक ही रेत के दामों में बढ़ोत्तरी होने से निर्माण की गुणवत्ता क ो मेंटेन रखना ठेकेदार के वश में नहीं हो पा रहा है जिसके कारण शहर में चल रहे अनेक शासकीय,अद्र्धशासकीय व निजी निर्माण कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। चूंकि ठेकेदार को टैंडर
की शर्तो के मुताबिक ही निर्माण कार्य करना होता है,अचानक ही रेत के बढ़े दामों ने उनके लिए मुसीबत खड़ी कर दी है।

इन क्षेत्रों में हो रहा है अवैध उत्खनन
नर्मदा की रेत की अवैध निकासी करने में हर कोई शामिल है। राजनैतिक,प्रशासनिक पुलिस एवं क्षेत्रीय दबंगों के साथ-साथ अवैध उत्खननकर्ताओं का एक गठजोड़ बन गया है। जो शहपुरा मातनपुर तिलवाराघाट चरगवां न्यू भेड़ाघाट के पीछे वाला हिस्सा,बेलख्ेाड़ा,कुआंखेड़ा आदि
घाटों से अवैध उत्खनन के लिए कुख्यात हो चुके हेैं। इन घाटों से अवैध रूप से रेत की निकासी तेजी से हो रही है। वहीं बगैर रॉयल्टी के चुकाए ही प्रशासन की शह पर रेत को बेंचने में लगे ठेकेदार जमकर मुनाफा कमा रहे
हैं।
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भवन निर्माण की बढ़ी लागत
रेत के रोजाना बढ़ रहे रेटों के चलते शहर में चल रहे भवन निर्माण के कामों में एक दम से ब्रेक सा लग गया हे। वहीं बिल्डरों व छोटे-मोटे ठेकेदारों को भी अपने मकान ऊंचे दामों में बेंचने की मजबूरी बन गई। इसके साथ ही शहर के अनेक क्षेत्रों में बन रहे भवनों की कीमत में इजाफा होने
से उन्हें खरीदना आमजन के वश के बाहर होता जा रहा है। अचानक ऐसी स्थिति रेत के बढ़े हुए दामों से हो रहा है,लेकिन प्रशासन की मूकदर्शकता सवालों के घेरे में आ गई है।

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