फर्जी चेक देकर खरीदा तीन सौ बोरा गेहूं हाईकोर्ट ने कहा- चेक बाउंस का नहीं है मामला

फर्जी चेक देकर खरीदा तीन सौ बोरा गेहूं
हाईकोर्ट ने कहा- चेक बाउंस का नहीं है मामला, तीन सौ बोरे गेहूं खरीदकर थमाए नौ लाख के फर्जी चेक, सरासर धोखाधड़ी
जबलपुर. मप्र हाईकोर्ट ने कहा है कि किसान से तीन सौ बोरे गेहूं खरीदकर बदले में नौ लाख रुपए के फर्जी चेक पकड़ा देना महज चेक बाउंस का मामला नहीं है, बल्कि सरासर धोखाधड़ी है। जस्टिस आरएस झा की सिंगल बेंच ने इस अभिमत के साथ होशंगाबाद के व्यापारी पर दर्ज किए गए धोखाधड़ी के मामले को उचित करार दिया। कोर्ट ने आरोपी व्यापारी की ओर से प्रकरण को सिविल प्रकृति का बताते हुए इसके खिलाफ दायर अर्जी निरस्त कर दी।


होशंगाबाद की सिंधी कॉलोनी निवासी जयराज जुदगानी ने आवेदन दायर कर उसके खिलाफ जिला अदालत होशंगाबाद के प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी द्वारा २५ अगस्त २०१६ को भादंवि की धारा ४२० व अन्य के तहत दर्ज प्रकरण की चार्जशीट स्वीकार करने के आदेश को चुनौती दी थी। अभियोजन के अनुसार होशंगाबाद के किसान हरि सिंह मीना ने शिकायत की थी कि जुदगानी ने उससे तीन सौ बोरे गेहूं का सौदा किया। इसके एवज में उसने गेहंू की कुल कीमत ९,०४,७८० रुपए के दो फर्जी चेेक दिए। बैंक में दोनों चेक बाउंस हो गए। पुलिस ने जुदगानी के खिलाफ भादंवि की धारा ४२० के तहत धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया।
आवेदक की ओर से तर्क दिया गया कि चेक बाउंस होने पर निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट की धारा १३८ के तहत सिविल प्रकरण बनता है। धोखाधड़ी का मामला नहीं। जबकि, सरकार की ओर से केस डायरी पेश कर बताया गया कि रकम नहीं होने से चेक बाउंस होना और चेक ही फर्जी होना, दो अलग-अलग बाते हैं। सुनवाई के बाद कोर्ट ने होशंगाबाद जिला अदालत के २५ अगस्त २०१६ के आदेश को उचित ठहराते हुए अर्जी निरस्त कर दी। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ईशार अहमद ने पैरवी की।

Related posts