“फांसी से पहले मुझे शेव करनी है, मैं ब्लडी मौलवी की तरह अल्लाह के सामने नहीं जाना चाहता”

मान लो आपको फ़ांसी होने वाली हो, आपके पास महज़ कुछ घंटे हो, तो आप क्या करेंगे ? ये सवाल पसंद नहीं आया तो सॉरी, दूसरा सवाल पूछते हैं, सोचिए कि अगर किसी एक्स वाय जेड को फ़ांसी लगने वाली हो, वो क्या चार या पांच घंटे पहले जेलर से क्या मांगेगा ? सोच लिया, अब एक सच्ची घटना को जान लो, जिसमें फ़ांसी पर चढ़ने से पहले एक देश का एक्स पीएम दो ख़्वाहिश ज़ाहिर करता है, बात पाकिस्तान की है, और जिसका शख़्स की ज़िंदगी का ये किस्सा है, उसका नाम था जुल्फ़िकार अली भुट्टो

चलिए किस्सा शुरु करते हैं, तो हुआ ये था कि पाकिस्तान के पीएम भुट्टो रावलपिंडी जेल में बंद थे, उन्हें फ़ांसी की सज़ा दी जा चुकी थी, केस एक नेता की  हत्या का था, बहरहाल भुट्टो को यकीन था कि उन्हें फ़ांसी नहीं दी जाएगी, लेकिन खेल का दूसरा पहलू ये था कि उन्हें फ़ांसी देने की तैयारी हो चुकी थी, तीन अप्रैल को रावलपिंडी जेल के अधिकारियों के पास भुट्टो को फांसी पर चढ़ा देने का फ़रमान पहुंचा, फ़ांसी की डेट 4 अप्रैल को तय की गई थी

रावलपिंडी जेल के इंजार्च लेफ़्टिनेंट कर्नल रफ़ी-उद-दीन ने कुछ घंटों बाद फ़ांसी दिए जाने की जानकारी भुट्टो को दी, जिस समय भुट्टो को फ़ांसी की सज़ा देने का फरमान सुनाया जा रहा था, भुट्टो अपनी कोठरी में लेटे हुए दीवार से सिर टिकाए हुए थे, इसके बाद रफ़ी उद दीन ने भुट्टो से पूछा कि

‘भुट्टो साहब कुछ ख़्वाहिश है आपकी ?

तो जुल्फ़िकार अली भुट्टो ने जेल इंजार्ज से आंखे मिलाते हुए कहा

हां, मेरी दो ख़्वाहिशें हैं, पहली तो ये कि मेरे दांतों में कुछ परेशानी हैं, मुझे डेंटिस्ट चाहिए, दूसरा मुझे शेव करनी है ?

भुट्टो का जवाब सुनकर जेल इंचार्ज को थोड़ी हैरानी हुई, तो भुट्टो ने कहा कि

‘मैं ब्लडी मौलवी नहीं हूं, मैं अल्लाह के सामने क्लीन शेव जाना चाहता हूं, किसी मौलवी की तरह दाड़ी में नहीं ‘

जेल इंजार्ज को भुट्टो साहब से हमदर्दी थी, सो उन्होंने दौड़-भाग के उनकी ये इच्छाएं पूरी की, और इसके बाद वो वक्त आया, जब भुट्टो को फ़ांसी दी जानी थी, भुट्टो कमज़ोर हो गए थे, कुछ कहते है कि उन्हें जेल में बेहद टॉर्चर किया था, जो भी हो, वो पैदल चलकर फ़ांसी के तख़्ते तक नहीं जा सकते थे, तो जेल प्रशासन ने फ़ैसला किया कि भुट्टो को स्ट्रेचर पर लिटा कर फ़ांसी के तख़्ते तक ले जाया जाएगा, भुट्टो के हाथ बांधे गए, स्ट्रेचर पर लिटाया गया,