मंडला..अवैध रूप से मनमानी वसूली जा रही फीस,भारत ज्योति विद्यालय प्रबंधन के कार्यप्रणाली,सुर्खियों में

सुप्रीम पावर हंटर न्यूज मंडला जिला प्रतिनिधि प्रशांत राज पटैल एवं मंडला रिपोर्टर ज्ञानेंद्र झा की खबर
निजी विद्यालयों में अवैध रूप से मनमानी वसूली जा रही फीस
अप्रैल महीना आया नही और जमा कराई जा रही फीस,अप्रैल माह की फीस न जमा करने के कारण छात्र-छात्राओं को नही दिखाया जा रहा परीक्षा परिणाम न ही दी जा रही हैं मार्कसीट,निराश होकर लौट रहे छात्र-छात्राओं के अभिभावक, भारत ज्योति विद्यालय प्रबंधन से रोष व्याप्त।इसके अलावा नर्सरी में एडमीशन की फीस लेने के बाद पुनः कक्षा पहली में एडमीशन के लिए वसूली जा रही फीस।

मंडला।आदिवासी बाहुल्य
जिला मंडला में शिक्षा को व्यवसायीक करण करके रख दिया हैं।मंडला मुख्यालय में स्थित भारत ज्योति विद्यालय प्रबंधन के कार्यप्रणाली हमेशा सुर्खियों में रही हैं।भारत ज्योति विद्यालय मे आने वाले अप्रैल माह की फीस जमा कराई जा रही इसके बाद बच्चों के परीक्षा परिणाम से अभिभावकों को अवगत कराया जा रहा हैं।मार्च महीना तक फीस जमा करने के बाद भी बच्चों के माता-पिता को रिपोर्ट कार्ड,मार्कशीट देने के अलावा दिखाने तक को तैयार नही हैं भारत ज्योति प्रबंधन।
जिसको लेकर बीते दिनांक 27 मार्च दिन बुधवार को सैकड़ो की तादाद् में बच्चों के माता-पिता को मार्कशीट देने की बात तो दूर दिखाने तक को नही दिया गया।अपने-अपने कार्य छोड़कर आये बच्चों के माता-पिता निराश होकर भारत ज्योति विद्यालय से वापस लौट गये।

प्रत्येक वर्ष बढ़ा दी जाती हैं फीस,और दो बार लिये जाते हैं एडमीशन फीस
बता दे कि भारत ज्योति प्रबंधन द्वारा वर्ष 2014 में नर्सरी की मासिक फीस 500/- रुपये लगभग लिए जाते थे और वर्ष 2015 में फीस डबल कर 1000/- हजार रुपये बसूलने लगे। जिसके विरोध में बच्चों के माता- पिता से लेकर कुछ संगठनों ने अधिक फीस वसूलने को लेकर एक रैली निकाल नारेबाजी भी की जाकर तत्कालीन कलेक्टर व शिक्षा विभाग को शिकायत भी की गई थी।इसके बाद भी जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग भारत ज्योति प्रबंधन के विरुद्ध कोई कार्यवाही नही कर पाया।वर्ष 2014 से लेकर 2018 तक केजीटू के बाद पहली कक्षा में एडमीशन फीस 5000/- हजार लिए जाते थे अब यह फीस वर्ष 2019 में 5000/- हजार रुपये से बढ़कर कर 8000/- हजार रुपये कर दिया गया हैं।

बच्चों के भविष्य को लेकर अभिभावक नही कर पाते शिकायत
उल्लेखनीय हैं कि भारत ज्योति विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली को लेकर छात्र-छात्राओं के माता- पिता के द्वारा शिकायत भी नही कर पाते।उनको डर सताता हैं कि कही शिकायत करने पर उनके बच्चों के साथ विद्यालय के स्टाफ के द्वारा गलत व्यवहार तो न करें।या फिर उनके बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ तो न करें।जिसके चलते शिकायत करने से भी अभिभावक डरते हैं। जिसका फायदा विद्यालय प्रबंधन द्वारा उठाया जाता हैं और संबंधित विभाग भी खमोशी की चादर ओढ़े हुए रहता हैं।ऐसे विद्यालयों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए या फिर इनका पंजीयन रद्द कर देना चाहिए।

कमीशनखोरी के चलते प्रत्येक वर्ष बदल दिए जाते हैं पाठ्यक्रम
शिक्षा विभाग की लचर व्यवस्था के चलते निजी विद्यालय में प्रत्येक वर्ष पाठ्यक्रम बदल दिए जाते हैं।जिनके दो या तीन बच्चे होते हैं जिनमें से पहला बच्चा पहली से दूसरी में जाता हैं तो दूसरे बच्चे को पहले के बच्चे की पाठ्यक्रम पढ़ने में नही आती।यह सब खेल शाला प्रबंधन द्वारा स्टेशनरी से कमीशन के चक्कर में गरीब बच्चे के अभिभावकों को हर साल लूट लिया जाता हैं।इसी तरह आई कार्ड बनाने के लिए अतिरिक्त राशि ली जाती हैं।पिकनिक ले जाने के लिए भी अलग से राशि ली जातीं हैं साथ ही स्थाई जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए फार्म के पैसे भी अलग से लिए जाते हैं।वित्तीय वर्ष मे स्थाई जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए राशि ली गईं किन्तु आज तक बच्चों को स्थाई प्रमाण पत्र नही दिया गया।जहाँ तक होमवर्क डायरी देने के लिए भी राशि ले ली जाती हैं।ऐसे अन्य खर्चे छात्र -छात्राओं से साल भर में बसूली की जाती हैं।
इनका कहना
में डीईओ को बोलता हूँ और जाँच कराता हूँ।
डाॅ.जगदीश चंद्र जटिया
कलेक्टर मंडला

आपने संज्ञान में लाया हैं विधिवत जाँच कराई जायेगी।
आशोक कुमार झारिया
जिला शिक्षा अधिकारी मंडला

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