सुप्रीम पावर –वारासिवनी खैरलांजी विधायक, डॉक्टर निर्मल के व्दारा लगाये गये प्रश्न के बाद भी नही मिली .अधोसंरचना शुल्क से राहत।


विगत विधानसभा सत्र मे क्षेत्रिय विधायक व्दारा वारासिवनी शहर के उपभोक्ता से ली जा रही अधोसंरचना राशि के संबध्द मे प्रश्न लगाकर राशि न लिये जाने की ओर ध्यान आकर्षित करवाया था। बावजुद इसके आज भी वारासिवनी शहर में उपभोक्ताओं से अधोसंरचना राशि लेना जारी है।यहाँ यह बात भी हम कहना चाहेंगे कि विधायक महोदय ने कम से कम प्रश्न लगाकर इस अधोसंरचना शुल्क की ओर सरकार का ध्यानाकर्षण कराया।तारीफ योग्य है ।
अधोसंरचना क्या है —
ऐसा छेत्र जिसका विकाश नही हुआ वहाँ के विकाश हेतु लगने वाली राशि अधोसंरचना के रूप में ली जाती है जिसके अंतर्गत बिजली सड़क नाली से सम्बंधित कार्य करवाये जाते है।इसमें पहले टोला मजरा के अंतर्गत बसी बस्तियां आती है जिसके सम्पूर्ण विकाश की जवाबदारी सरकार की होती है ।दूसरे अविकसित छेत्र जो कालोनी के रूप में शहर में कुकुरमुत्तों की तरह दिखाई पड़ते है उसमें विकाश की जवाबदारी सम्बंधित कालोनाइजर की होती है न कि उपभोक्ता की ।
यदि यह राशि नियमानुसार सही
ली जा रही है तो क्या मध्यप्रदेश मे मात्र वारासिवनी मे ही अवैध या अविकसित कालोनीयों का निर्माण हुआ है ।बाकी कहीं नही।या ये माना जाये कि वारासिवनी मे जो राशि ली जा रही है वह भु माफियाओं के साथ मधुर संबध्द न बन पाने के कारण या फिर यह कहे कि अधिकारी द्वारा दुर्भावना से ग्रसित होकर यह अधोसंरचना राशि उपभोक्ता के ऊपर थोपी गई है
आखिर कालोनी के विधुतीकरण की जवाबदारी किसकी थी कालोनाइजर की या बिजली विभाग की।यदि गलत तरीके से विभागीय अधिकारीयों व्दारा विधुतीकरण करवाया गया है तो क्या उन पर कोई कार्यवाही की गई नही तो क्यों नही । क्या जब विधुतीकरण करवाया गया तब कालोनी एक्ट लागु हो गया था यदि हाॅ तो यह गलती विधुतीकरण करवाने वाले अधिकारियों की है जिनकी गलती का खामियाजा वारासिवनी शहर की जनता आज भी भुगत रही है । और इसका लाभ कालोनाइजर
उठा रहे हैं।यदि ऐसा ही हुआ है तो लगने वाली राशि कालोनाईजरों से जमा करवाकर विधुतीकरण करवाना आम जनता के हित मे होता।दुसरा पहलु ये कि यदि नियमानुसार विभाग के व्दारा की गई गलती को भुल सुधार करने का साहस कर विभाग को फायदा दिलाने का काम किया है तो ऐसे इमानदार अधिकारी पुरुस्कार पाने के हकदार हैं।इनका अनुसरण कर अपने अपने क्षेत्र मे बन रही कालोनी का विधुतीकरण नियमानुसार करवा कर कंपनी के साथ साथ आम उपभोक्ता को लाभ दिलाना जनहित मे होगा।
अब देखना यह है कि कौन कौन अपनी जगह सही हैं कालोनाइजर या विधुतीकरण करवाने वाले अधिकारी या नियमानुसार कार्यवाही करने वाला अधिकारी।क्या होगी इसकी जाॅच व आम जनता को मिलेगी इस अधोस॔रचना राशि से मुक्ति।सूत्रों की माने तो विभागीय अधिकारियों व्दारा गंगोत्री कालोनी में उपभोक्ता व्दारा जमा की गई राशि के बदले टांसफारमर लगा देने के बाद भी इस मद की राशि ली जा रही है।आखिर कब बंद होगा शोषण आम जनता का आखिर आशा कि किरण कौन जगायेगा वारासिवनी के आमजनमानस मे बस कुछ ही माह बाद नई विधानसभा के लिये वोटों की गुहार लेकर आपके बीच सभी पार्टियों के प्रत्याशी आयेगें । अपना अपना पक्ष रखेगें आपके सामने बस फैसला आपको करना है कि कौन सही है कौन गलत है ।किसने छेत्र की समस्या को किस स्तर तक उठाया कितने आंदोलन किये ।चाहे समस्या रेत खनन की हो अवैध शराब बिक्री की हो सप्लाई हो रहे नकली चावल की हो ।अवैध कालोनियों की हो ।बिजली विभाग में व्याप्त भ्र्ष्टाचार की हो ।कृषि मंडी में व्याप्त घोटालो की हो ।देश प्रदेश के किसी कोने में होने वाली घटनाओं पर आंदोलन और पुतला दहन अलग बात है किंतु छेत्र की जनता की समस्या और घोटालो पर ।सम्बन्धितों का पुतला दहन कर आंदोलन करने के लिए सच्चे जननायक का जज़्बा चाहिए इन पाॅच सालों मे छेत्र में कितना विकाश बढ़ा और किस नेता का कितना विकाश हुआ यह स्वविवेक का मामला है।बस तैय्यार रहिये अपने ऊपर हुये शोषण का बदला लेने समय निकट ही है ।समय समय पर और भी काफी मुद्दों को लेकर सुप्रीम पावर न्यूज़ आपके बीच होगा
महेश कातरे

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